Category: Uncategorized
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ऐसे गुज़र होगी नहीं!
पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं,कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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यह श्वान – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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आज क्यों शर्मा रहा हूँ!
भरम तेरे सितम का खुल चुका है,मैं तुझसे आज क्यों शर्मा रहा हूँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है!
आज मैं सुदर्शन फाक़िर जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| फाक़िर साहब ने बहुत अच्छी शायरी की है, उनकी बहुत सी ग़ज़लें प्रसिद्ध गायकों ने गयी हैं, जैसे कुछ शेर मुझे याद या रहे हैं- अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें, हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें| ***** ग़म बढे़ आते हैं…