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मीरा दीवानी दे मौला!
फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा,फिर मंदिर को कोई मीरा दीवानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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फिर रोशन कर ज़हर का प्याला
फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें,झूठों की दुनिया में सच को ताबानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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सोच समझवालों को___
दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है,सोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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गुड़धानी दे मौला!
गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला,चिड़ियों को दाने, बच्चों को गुड़धानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए!
आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ ज़नाब कैफी आज़मी साहब की लिखी हुई, कैफी आज़मी साहब हमारे देश के जाने माने और मशहूर शायर रहे हैं और उनकी बहुत सी रचनाओं का फिल्मों में भी सदुपयोग किया गया है| कैफी आज़मी साहब की इस ग़ज़ल को फिल्म ‘हँसते जख्म’ के लिए मदन मोहन जी…
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रुड्यार्ड किप्लिंग की कविता – ‘यदि’
आज पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ, लीजिए प्रस्तुत है मेरे द्वारा किए गए अनुवाद की यह पोस्ट| आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा…