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प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है!
उनसे नज़रें क्या मिलीं रौशन फ़ज़ाएँ हो गईं, आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है| निदा फ़ाज़ली
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फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है!
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है, इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है| निदा फ़ाज़ली
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सामने फ्लैट पर!
स्वर्गीय रवींद्रनाथ त्यागी जी की पहचान मुख्य रूप से एक व्यंग्य लेखक के रूप में थी लेकिन उन्होंने कुछ सुंदर कविताएं भी लिखी थीं| आज मैं स्वर्गीय रवींद्रनाथ त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ जिसमें दिन का चित्रण देखिए किस-किस रूप में किया गया है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवींद्रनाथ त्यागी…
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कौन जवाँ कौन हसीं रहता है!
दिल फ़सुर्दा तो हुआ देख के उस को लेकिन, उम्र भर कौन जवाँ कौन हसीं रहता है| अहमद मुश्ताक़
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वक़्त का एहसास नहीं रहता है!
रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए, इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है| अहमद मुश्ताक़
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कोई कहीं कोई कहीं रहता है!
इक ज़माना था कि सब एक जगह रहते थे, और अब कोई कहीं कोई कहीं रहता है| अहमद मुश्ताक़
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कहाँ अब वो मकीं रहता है!
जिसकी साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे, ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है| अहमद मुश्ताक़
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शहर की गलियों में कहीं रहता है!
मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है, वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है| अहमद मुश्ताक़
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मगर आँसू निकल पड़े!
मुद्दत के बा’द उसने जो की लुत्फ़ की निगाह, जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े| कैफ़ी आज़मी
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नाम पे जिसके उबल पड़े!
साक़ी सभी को है ग़म-ए-तिश्ना-लबी मगर, मय है उसी की नाम पे जिसके उबल पड़े| कैफ़ी आज़मी