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हास्य कविता- चंद्रमुखी
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं ओमप्रकाश आदित्य जी की हास्य कविता चंद्रमुखी प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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पिता के नाम!
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हे पितायदि हो कहीं, तो क्या लिखूं तुमकोबस यही, जो जिस तरह थाउस तरह ही है। पत्र है अभिवादनों की शृंखला केवलहम अभी जीवित बचे हैं, यह बताने को,और आश्वासन इसी अनुरूप पाने को,मैं न मानूं किंतु प्रचलनइस तरह ही है।…
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कुछ याद-जज़ीरे हैं!
कैसे ही तलातुम हों मगर क़ुल्ज़ुम-ए-जाँ में,कुछ याद-जज़ीरे हैं कि ओझल नहीं होते| अहमद फ़राज़
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जल-थल नहीं होते!
शाइस्तगी-ए-ग़म के सबब आँखों के सहरा,नमनाक तो हो जाते हैं जल-थल नहीं होते| अहमद फ़राज़
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कुछ मुश्किलें ऐसी हैं!
कुछ मुश्किलें ऐसी हैं कि आसाँ नहीं होतीं,कुछ ऐसे मुअम्मे हैं कभी हल नहीं होते| अहमद फ़राज़
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अंदर की फ़ज़ाओं के!
अंदर की फ़ज़ाओं के करिश्मे भी अजब हैं,मेंह टूट के बरसे भी तो बादल नहीं होते| अहमद फ़राज़
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ऐसा है कि सब ख़्वाब!
ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते,जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते अहमद फ़राज़
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तुम्हारी भी जै जै!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं दीवाना फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- तुम्हारी भी जै जै, हमारी भी जै जै, न तुम हारे न हम हारे! आशा है आपको यह पसंद आएगाधन्यवाद।
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आश्ना के नाम से!
‘फ़ैज़’ उन को है तक़ाज़ा-ए-वफ़ा हम से जिन्हें,आश्ना के नाम से प्यारा है बेगाने का नाम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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एक बिरहमन ने कहा है कि !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से, नववर्ष के अवसर पर आज मैं मिर्ज़ा ग़ालिब जी की एक नज़्म प्रस्तुत कर रहा हूँ- एक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है! आशा है आपको ये पसंद आएगा, धन्यवाद । *****