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मैं हूँ।
आज मैं हिंदी नवगीत के सुप्रसिद्ध हस्ताक्षर स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत – आसपासजंगली हवाएँ हैं,मैं हूँ । पोर-पोरजलती समिधाएँ हैंमैं हूँ । आड़े-तिरछेलगावबनते आते, स्वभावसिर धुनतीहोंठ की…
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पाव भर कद्दू से रायता!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ उपन्यास एवं कहानी लेखिका और कवियित्री सुश्री ममता कालिया जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी एक रचना मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री ममता कालिया जी की यह कविता – एक नदी की तरहसीख गई है घरेलू औरतदोनों हाथों में बर्तन…