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सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं!
हुस्न को चाँद जवानी को कँवल कहते हैं, उनकी सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं| क़तील शिफ़ाई
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कश्तियों को डुबोया करेंगे हम!
गर दे गया दग़ा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’, साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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बीज न बोया करेंगे हम!
दिल जल रहा है ज़र्द शजर देख देख कर, अब चाहतों के बीज न बोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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जुर्म भी गोया करेंगे हम!
मजबूरियों के ज़हर से कर लेंगे ख़ुदकुशी, ये बुज़दिली का जुर्म भी गोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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चाँदनी में भिगोया करेंगे हम!
जब दूरियों की आग दिलों को जलाएगी, जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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पलक में पिरोया करेंगे हम!
आँसू छलक छलक के सताएँगे रात भर, मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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याद में रोया करेंगे हम!
मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, इक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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प्रतीक्षा- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर करने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के…
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घर आओ तो यारों की तरह!
हमसे दरवेशों के घर आओ तो यारों की तरह, हर जगह ख़स-ख़ाना ओ बर्फ़ाब मत देखा करो| अहमद फ़राज़