मैं भी रोज़ इक ख़्वाब!

तुम भी हर शब दिया जला कर पलकों की दहलीज़ पे रखना,
मैं भी रोज़ इक ख़्वाब तुम्हारे शहर की जानिब भेजूँगा|

अमजद इस्लाम अमजद

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