एक नाम अधरों पर आया!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।

नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता –

एक नाम अधरों पर आया,
अंग-अंग चंदन वन हो गया.

बोल है कि वेद की ऋचायें
सांसों में सूरज उग आयें
आखों में ऋतुपति के छंद तैरने लगे
मन सारा नील गगन हो गया.

गंध गुंथी बाहों का घेरा
जैसे मधुमास का सवेरा
फूलों की भाषा में देह बोलने लगी
पूजा का एक जतन हो गया.

पानी पर खीचकर लकीरें
काट नहीं सकते जंजीरें
आसपास अजनबी अधेरों के डेरे हैं
अग्निबिंदु और सघन हो गया.

एक नाम अधरों पर आया,
अंग-अंग चंदन वन हो गया.

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

2 responses to “एक नाम अधरों पर आया!”

  1. नमस्कार 🙏🏻 दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको सपरिवार 🙏🏻

    Liked by 2 people

    1. नमस्कार जी, दीपावाली की हार्दिक शुभकामनाएं

      Liked by 1 person

Leave a comment