प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

ये दिल की कच्ची दीवारें
कितने धक्के खाती हैं।
यदि तुम करते रहे भरोसा
वही मिलेगा धोखा-धोखा
प्रेम करो तो प्रेम मिलेगा
यह है सबसे बडा शिगूफा,
यह प्रक्रिया नहीं रुकती है
ऋतुएं आती-जाती हैं।
शायद प्रेम वही शाश्वत है
जो हम प्रभु से करते हैं,
बाकी रंग सभी कच्चे हैं
चढ़ते और उतरते हैं,
हर युग में ये भ्रम की ऋतुएं
अपने को दोहराती हैं।
लेकिन नशा रहेगा कायम
दीवाने फिर फिर आएंगे
कुछ दिन भ्रमित रहेंगे लेकिन
फिर सिर धुन पछतायेंगे,
भाग्यवान वे गाथा जिनकी
सुखद अंत तक जाती है।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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