आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।
रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –

कौन कहता है कि पीछे जा रहा हूँ मैं?
जो गये आगे उन्हीं से प्रेरणा लेकर,
जो रहे पीछे उन्हें नव-चेतना देकर,
रंग ऐसा हूँ कि सभी पर छा रहा हूँ मैं।
कौन कहता है कि पीछे जा रहा हूँ मैं?
है किसी में दम जो मेरा गम गलत कर दे,
मैं जगाऊँ राग कोई साथ स्वर दे,
इस दुराशा में हृदय बहला रहा हूँ मैं।
कौन कहता है कि पीछे जा रहा हूँ मैं?
वह बढ़ेंगे क्या जिन्हें रुकना नहीं आता,
उच्चता पाकर जिन्हें झुकना नहीं आता,
जो नहीं समझे उन्हें समझा रहा हूँ मैं।
कौन कहता है कि पीछे जा रहा हूँ मैं?
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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