आज प्रस्तुत है हल्के-फुल्के मूड में लिखा गया एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

भोजन पांच सितारा स्थल में!
कुछ थे अतिथि खानदानी से
मौका पाकर रौब दिखाते
कुछ थे वहाँ मेहरबानी से
पूर्ण सहज वे कब हो पाते
सबका संगम, दावत गृह में,
खाना मूल वही होता पर
कितने नए नाम-रूपों में
युवक-युवतियां वहाँ सजाते
सभी खाद्य निश्चित खांचों में,
लालच मन में और उदर में,
भोजन कैसे लें जब स्टार्टर
भर डाले हैं पेट बराबर
उस पर पेय और मीठा भी
बुला रहे अपने कोनों पर
शामिल हम हैं खाद्य समर में!
होते शामिल सारे ही जन
ऐसे आयोजन में मन से
जी भर दिखलाते हैं इसमें
जन से प्रीति, युद्ध भोजन से
खूब यहाँ संघर्ष देखते
जी भर भोजन का पाचन से!
ऐसे सामाजिक आयोजन
कद कुछ और बढ़ा देते हैं,
लेकिन आयोजक को तो ये
गहरी चपत लगा देते हैं,
है व्यवहार नए ही स्तर में।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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