लंबी टैक्सी यात्रा!

आज प्रस्तुत है एक और गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-


बढ़ते रहे निकट मंज़िल के
आते रहे नींद के झोंके।

रस्ते हैं हमको अनजाने
कहाँ-किधर सब चालक जाने,
बस मालूम कहाँ जाना है
गूगल कहता वह हम मानें

सिग्नल हमें चलाए, रोके।


यात्राएं जीवन का हिस्सा
कभी कभी बन जातीं किस्सा
एक जगह कब तक रह लेंगे
बिना सहे अनुभव का घिस्सा,

कभी कभी पथ देता धोखे।

सुनते चलते जाना जीवन
घूमे हैं हम भी वन-उपवन
पैदल कभी, कभी वाहन से
जल, थल, नभ कोई हो साधन,


जाना पार हमें शिखरों के।

यह यात्रा टैक्सी की यात्रा
भोजन कर जब हुए उनींदे
चिंता यही न सोये चालक
चलते जाना है कुछ घंटे,

पार कई कस्बों, नगरों के।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार


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One response to “लंबी टैक्सी यात्रा!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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