आज प्रस्तुत है एक कविता, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

किस मौसम पर कविता लिखें
आप ही बताओ जी।
गर्मी- जब लू से झुलसकर
मरते हैं लोग,
जो भी हो,
काम पर तो जाना है
वरना कौन देगा मजूरी
वहाँ एसी, कूलर की तो बात क्या
पंखा भी नहीं होता जी,
जहाँ तपती धूप में
दिहाड़ी पकानी होती है।
बरसात पर लिखी कविता
कहीं बाढ़ ही में
न बह जाए,
जब इंसान, बड़े-बड़े सामान
बह जाते हैं।
छप्पर टपकता भर नहीं
उड़ भी जाते हैं छप्पर।
कितनी ही जानें जाती हैं
बरसात के मौसम में
क्या इंसान, क्या मवेशी!
और सर्दी
यह मौसम तो केवल
अमीरों के लिए है न जी
एक पर एक गर्म कपड़े
गीज़र, हीटर
ये सब करते हैं रक्षा
बहुत से गरीब तो
रात में सोते हैं
फुटपाथ पर
सुबह उनका
निष्प्राण शरीर ही मिलता है।
छोटा सा वसंत का मौसम,
ये बीत जाता है
बाकी मौसमों का
सामना करने की
तैयारी में।
किस मौसम पर लिखे आखिर
कविता कोई!
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।
********
Leave a reply to Nageshwar singh Cancel reply