मुरली सा कोई शख्स!

मुरली सा कोई शख्स बजा जब भी ध्यान में,
मेरे बदन की आबो-हवा गोकुली हुई।

सूर्यभानु गुप्त

One response to “मुरली सा कोई शख्स!”

  1. Your back sir 🙌 🙏 👏

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