टहनी पर फूल जब खिला!

एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी नवगीत कवि स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ।

मालवीय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत –

टहनी पर फूल जब खिला
हमसे देखा नहीं गया ।

एक फूल निवेदित किया
गुलदस्ते के हिसाब में
पुस्तक में एक रख दिया
एक पत्र के जवाब में ।
शोख रंग उठे झिलमिला
हमसे देखा नहीं गया ।

प्रतिमा को
औ समाधि को
छिन भर विश्वास के लिये
एक फूल जूड़े को भी
गुनगुनी उसांस के लिये ।
आलिगुंजन गंध सिलसिला
हमसे देखा नहीं गया ।

एक फूल विसर्जित हुआ
मिथ्या सौंदर्य-बोध को
अचकन की शान के लिये
युग के कापुरुष क्रोध को
व्यंग टीस उठी तिलमिला ।
हमसे देखा नहीं गया ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********


2 responses to “टहनी पर फूल जब खिला!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 3 people

    1. नमस्कार जी

      Liked by 1 person

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply