गीत लिखो !

आज हल्के-फुल्के मूड की अपनी एक नई रचना, छोटी बहर की ग़ज़ल, शेयर कर रहा हूँ-


देखो तोता-मैना गीत लिखो,
तुमसे बोला है ना, गीत लिखो।

कुछ अपनी दुकान जम जाए बस,
देंगे चना-चबैना, गीत लिखो।

मुक्त हवा करताल बजाएगी,
काम करो तुम अपना, गीत लिखो।

खुशी, उदासी, बेचैनी, संभ्रम
आएंगे-जाएंगे गीत लिखो।

भाव, अभाव, प्रभाव बदलते हैं,
ये सब मत सोचो, बस गीत लिखो।

भला-बुरा सब लोग बता देंगे,
वो सब होगा, पहले गीत लिखो।

कितना जीवन गीतों ने पाया
देखा जाएगा, तुम गीत लिखो।

कभी-कभी शब्दों से खेलो तुम
कभी भाव में बहकर गीत लिखो।

जीवन बहुत जटिल मेरे भाई,
कुछ हो जाय सरलतर गीत लिखो।

सामंजस्य बिठाओ जीवन से,
जैसी भी हालत हो गीत लिखो।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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2 responses to “गीत लिखो !”

  1. वाह 👌👌 नमस्कार 🙏🏻

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    1. धन्यवाद जी, नमस्कार

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