अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ-

मिले प्रेम तो गीत प्रेम के लिख लेना,
यूं लिखने को भाव बहुत से होते हैं।
ऐसे भी हैं जिन्हें प्रेम किंचित न मिला,
खूब व्यंग्य कविता में करते रहे सदा,
कुछ हैं तीरन्दाज ओज से भरे हुए,
युद्ध ठानते रहे मित्र वे यदा-कदा,
करना हो जो करो पूर्ण समभाव लिए
बहते रहो, बहाव बहुत से होते हैं।
जो भी हो, नैराश्य नहीं आने देना,
कुछ तो जीवन में करते ही जाना है
कोई सुनता है ये भी मत सोचो तुम,
जो मन में आए वो कहते जाना है,
सहना तो सबको जीवन में होता है
सफर बीच ठहराव बहुत से होते हैं।
वक़्त बताएगा क्या कुछ था ठीक कहा
बस निष्कपट हृदय से कहते जाना है।
जीवन जो भी धुन पैदा करता उस पर,
तन्मय होकर सुख-दुख गाते जाना है
वातावरण कहाँ मनचाहा मिलता है,
व्यतिक्रम औ भटकाव बहुत से होते हैं।
एक लीक पर कहाँ ज़िंदगी चलती है,
जीवन तो सुख-दुख का मेला-ठेला है,
दूर रहा जो राग-द्वेष के रोगों से,
देखो तो वह जीव नितांत अकेला है
सीधे-सीधे मित्र कहाँ तक जाओगे,
इस पथ में बिखराव बहुत से होते हैं।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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