और कितनी ख़्वाहिशें!

शहर आबादी से ख़ाली हो गए ख़ुश्बू से फूल,
और कितनी ख़्वाहिशें हैं जो दिलों में क़ैद हैं|

सलीम कौसर

One response to “और कितनी ख़्वाहिशें!”

  1. वाह्ह्हह्ह्ह्ह 👌

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