ग़म की पासबानी है!

दिल मिरा और ये ग़म-ए-दुनिया,
क्या तिरे ग़म की पासबानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

2 responses to “ग़म की पासबानी है!”

  1. सुंदर सृजन 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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