आज रफी साहब का गाया हुआ एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे फिल्म ‘नई रोशनी’ के लिए राजेंदर कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत रवि जी ने तैयार किया था।
वास्तव में बहुत सी बार ऐसा लगता है कि कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाते कि ज़िंदगी किस तरह जी जाए, उनका जीवन अन्य सामान्य लोगों जैसा हो ही नहीं पाता!
कुछ लोग होते हैं जो प्रेम करते रहते हैं और प्रेम में ही उनका जीवन बीत जाता है और कुछ लोग जीवन भर प्रेम के लिए तरसते रहते हैं।
प्रेम के लिए पहली शर्त यह होती है कि आप किसी और को प्रेम करने के योग्य मानें। मुझे इसकी सीधी पहचान यह लगती है कि जब आप जानते हैं कि सामने वाला आपसे प्रेम करता है, तब आप जो बात आपके मन में आए उसे निस्संकोच कह सकते हैं, आपको यह सोचने की ज़रूरत नहीं होती कि वह इस बात का बुरा तो नहीं मान जाएगा। जो आपसे प्रेम करता है वह आपकी किसी बात का बुरा नहीं मानेगा और जो प्रेम नहीं करता वो किसी भी बात का बुरा मान सकता है।
खैर आप गीत के बोलों के माध्यम से रफी साहब द्वारा डूबकर गाया गया यह गीत याद कीजिए-

किस तरह जीते हैं ये लोग बता दो यारो
हम को भी जीने का अंदाज़ सिखा दो यारो
प्यार लेते हैं कहाँ से ये ज़माने वाले
उन गली-कूचों का रस्ता तो दिखा दो यारो
दर्द के नाम से वाक़िफ़ न जहाँ हो कोई
ऐसी महफ़िल में हमें भी तो बिठा दो यारो
साथ देना हो तो ख़ुद पीने की आदत डालो
वर्ना मय-ख़ाने के दर हम से छुड़ा दो यारो
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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