प्रकृति संदेश!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक बाल कविता शेयर कर रहा हूँ|

द्विवेदी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोहन लाल द्विवेदी जी की यह कविता –


पर्वत कहता शीश उठाकर,
तुम भी ऊँचे बन जाओ।
सागर कहता है लहराकर,
मन में गहराई लाओ।

समझ रहे हो क्या कहती हैं
उठ उठ गिर गिर तरल तरंग
भर लो भर लो अपने दिल में
मीठी मीठी मृदुल उमंग!

पृथ्वी कहती धैर्य न छोड़ो
कितना ही हो सिर पर भार,
नभ कहता है फैलो इतना
ढक लो तुम सारा संसार!


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********


2 responses to “प्रकृति संदेश!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply