गेसुओं की छाँव में!

गेसुओं की छाँव में दिल-नवाज़ चेहरे हैं,
या हसीं धुँदलकों में फूल हैं बहारों के|

साहिर लुधियानवी

2 responses to “गेसुओं की छाँव में!”

  1. बहुत सुंदर 👌

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    1. धन्यवाद जी

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