अजनबी दयारों के!

पहले हँस के मिलते हैं फिर नज़र चुराते हैं,

आश्ना-सिफ़त हैं लोग अजनबी दयारों के|

साहिर लुधियानवी

One response to “अजनबी दयारों के!”

  1. वाह्ह्हह्ह्ह्ह 👌

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