ख़ुश्क मिट्टी ही ने!

ख़ुश्क मिट्टी ही ने जब पाँव जमाने न दिए,
बहते दरिया से फिर उम्मीद कोई क्या रक्खे|

वसीम बरेलवी

One response to “ख़ुश्क मिट्टी ही ने!”

  1. वाह्ह्हह्ह्ह्ह 👌

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