गीतों का बादल!   

आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ।

अवस्थी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर नहीं हैं।  

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत  –

मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।
प्यासे नयनों में हँसता काजल हूँ ।

पाँवों के नीचे गहरा सागर है
माथे के ऊपर बिखरा अम्बर है
जब मेरी आँखें कलियों पर बिगड़ी
अनगिन काँटों की नोकें साथ गड़ीं
गीतों में भर-भर जीवन पीता हूँ
जब तक मेरा मन है, मैं जीता हूँ

लेकिन मरने के डर से घायल हूँ
मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।

संगीत छलकता मेरे तन-मन से
मैं हूँ गीतों का साथी बचपन से
रंगीन तितलियाँ मन बहलाती हैं
स्वाधीन बिजलियाँ पंथ दिखाती हैं
मैं बून्द-बून्द से बाँधे हूँ सागर
मालूम नहीं है मुझको अपना घर

मैं नीले नभ में उड़ता आँचल हूँ
मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।

मैं चाँद-सितारों को चूमा करता
उजड़ी गलियों में भी घूमा करता
मुझपर सबका अधिकार बराबर है
पानी-सा कोमल मेरा अन्तर है
नभ की गंगा में रोज़ नहाता हूँ
औ’ द्वार-द्वार जलधार बिछाता हूँ

धरती की गोदी में गंगाजल हूँ
मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।

मुझसे मिलने को प्यास मचलती है
अन्तर में तपसिन बिजली पलती है
मरुथल में जल के फूल लुटाता हूँ
बून्दों से पथ की धूल उठाता हूँ
प्यासों की ख़ातिर सागर छलता हूँ
मिटकर बनने के लिए मचलता हूँ

मैं जीवन में यौवन की हलचल हूँ
मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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2 responses to “गीतों का बादल!   ”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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