आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता –

भले आदमी
रुक रहने का पल
अभी नहीं आया
बीज जिस फल के लिए
तूने बोया था वह फल
अभी नहीं आया तेरे वृक्ष में
टूटती हुई साँस की डोर को
अभी जितना लंबा खींच सके
खींच
सींच चुका है तू
वृक्ष को अपने पसीने से
अब अपने ख़ून से सींच !
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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