चिड़ियों की तरह!

उड़ के इक रोज़ बहुत दूर चली जाती हैं,
घर की शाख़ों पे ये चिड़ियों की तरह होती हैं|

मुनव्वर राना

2 responses to “चिड़ियों की तरह!”

  1. बेहतरीन 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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