हो सके तो चला आ!

फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,
जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू|

अहमद फ़राज़

2 responses to “हो सके तो चला आ!”

  1. क्या शेर है 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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