पेड़!

आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।

इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धनंजय वर्मा जी की यह कविता –


रास्ते का पेड़
दुपहरिया में तप
पत्तियों की ताल पे
झुमक झूम झूमर गीत गाता है ।

राह का थका
हर मुसाफिर
तने पर सर रख
सुस्ताता है
पत्तियों की तालियों से
सुर मिला
गुनगुनाता है
पसीने की बूँद पोंछ
थकान उसे सौंप
चला जाता है ।

जो भी आता है
अपना कर साँस भर
छाँह पा जाता है ।

मैं किसे अपनाऊँ
साँस भर
छाँह कहाँ पाऊँ…?


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

********

2 responses to “पेड़!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 2 people

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply