आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कथाकार एवं कवि स्वर्गीय गंगा प्रसाद विमल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
विमल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गंगा प्रसाद विमल जी की यह कविता –

रूपांतर
इतिहास
गाथाएं
झूठ हैं सब
सच है एक पेड
जब तक वह फल देता है तब तक
सच है
जब यह दे नहीं सकता
न पत्ते
न छाया
तब खाल सिकुडने लगती है उसकी
और फिर एक दिन खत्म हो जाता है वह
इतिहास बन जाता है
और गाथा
और सच से झूठ में
बदल जाता है
चुपचाप।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********
Leave a reply to samaysakshi Cancel reply