आज मैं भारत के श्रेष्ठ शायर स्वर्गीय खुमार बाराबंकवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ। आपने हिंदी फिल्मों के लिए भी बहुत से गीत लिखे थे।
इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय खुमार बाराबंकवी जी की यह ग़ज़ल –

दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये
दो बाज़ुओ की हार के दिन याद आ गये
गुज़रे वो जिस तरफ से बज़ाए महक उठी
सबको भरी बहार के दिन याद आ गये
ये क्या कि उनके होते हुए भी कभी-कभी
फोर्दोस-ए-इंत्ज़ार के दिन याद आ गये
वादे का उनके आज खयाल आ गया मुझे
शक और ऐतबार के दिन याद आ गये
नादा थे जब्त-ए-गम का बहुत हज़रत-ए-“खुमार”
रो-रो जिए थे जब वो याद आ गये
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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