आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
केदारनाथ अग्रवाल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता –

चुप भी एक पौधा है
पत्थर का बना हुआ
आँसू पर उगा हुआ
दीपक पर खड़ा हुआ
वायु चली, लेकिन वह उड़ा नहीं
ठंड पड़ी, लेकिन वह गला नहीं
रात हुई, लेकिन वह सोया नहीं
सुबह हुई, लेकिन वह जगा नहीं
बीते दिन, लेकिन वह खोया नहीं
बोलता है, लेकिन इस धीरे से
कि उसको हम सुनते नहीं,
सुनने का प्रयास करें
तब भी सुन सकते नहीं।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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