पिछले दिनों कुछ इस प्रकार की चिंता व्यक्त की गई कि गोवा में विदेशी पर्यटकों का आना काफी कम हुआ है। मुझे इस विषय में अधिक जानकारी नहीं है लेकिन क्योंकि मैं गोवा में ही रहता हूँ इसलिए मुझे इस बात की चिंता है कि गोवा में अधिक पर्यटक आने चाहिएं और मेरा ध्यान कुछ ऐसे संभावित कारणों की तरफ भी जाता है, जिनसे शायद पर्यटकों के आने पर प्रतिकूल प्रभाव पडता हो।

एक बात तो जो मैंने कहीं पढी थी उसका ही उल्लेख करना चाहूंगा कि एशिया में कई ऐसे देश हैं जहाँ काफी आकर्षक पर्यटन स्थल हैं और वहाँ रुकना, घूमना भारत के मुकाबले काफी सस्ता है, ये बात सिर्फ गोवा नहीं अपितु भारत के अनेक पर्यटन स्थलों पर लागू होती है कि होटलों की दरों पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। यह प्रवृत्ति हमारे यहाँ काफी है कि कोई विदेशी पर्यटक है तो उसको एक ही झटके में हलाल कर दिया जाए। अभी अखबार में पढा था कि कोई केले बेचने वाला किसी विदेशी को सौ रुपये में एक केला बेचने की कोशिश कर रहा था। हमारी संस्कृति में जो महान मूल्य दर्शाए जाते हैं, अक्सर हम उनके पूरी तरह विपरीत व्यवहार करते हैं। हाँ तो होटलों को भी यह छूट नहीं होनी चाहिए कि वे पर्यटन के सीज़न में मनमानी दरों पर रूम बुक करें।

एक और समस्या जो गोवा में सबसे भयंकर है, और शायद देश में यह समस्या यहाँ पर ही है, वह है- जिसे ‘टैक्सी माफिया’ का नाम दिया गया है। सच्चाई है कि यहाँ की सरकारों ने कभी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया ही नहीं है। ऐसा भी हुआ है कि कोई सवारी हवाई जहाज से यात्रा करके जब गोवा में उतरी और यहाँ अपनी मंज़िल तक जाने के लिए टैक्सी की तो उससे जो किराया मांगा गया वो हवाई यात्रा के किराए से ज्यादा था! किसी राजनैतिक दल में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे इस गुंडागर्दी को समाप्त करते हुए यहाँ भी ओला-ऊबर जैसी सेवाएं उपलब्ध करा सके।
एक और समस्या है, आवारा कुत्तों की समस्या, पिछले दिनों कई विदेशी पर्यटक इनका शिकार हो चुके हैं। हमारे यहाँ धार्मिक आस्था के कारण हम लोग इनको खिलाते भी रहते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि पर्यटक स्थलों पर इनकी भारी संख्या में उपस्थिति वास्तव में देशी-विदेशी पर्यटकों को आतंकित करती है और बहुत से लोग इनके शिकार भी हो चुके हैं।
मैं मानता हूँ कि जीव-हत्या करने की आवश्यकता नहीं है, इनको इन सार्वजनिक स्थलों से हटाकर कहीं रखा जा सकता है और नसबंदी करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आगे इनकी संख्या न बढे। एक घटना तो मुझे राजधानी दिल्ली की याद आ रही है कि जब कोई बडा विदेशी अतिथि आया हुआ था और कोई कुत्ता राष्ट्रपति भवन में घुस आया था।
वैसे सिर्फ कुत्तों की ही बात नहीं है, कई बार तो यह भी देखा जाता है कि किसी चौराहे के बीच बैठकर गाय-भैंस भी मानो कोई सम्मेलन कर रही हों। ऐसे मामलों में उनके स्वामियों के विरुद्ध समुचित कार्रवाई की जानी चाहिए। जहाँ तक मुझे याद है, दिल्ली, ग़ुडगांव और उत्तर भारत के बहुत से स्थानों पर बंदरों का भी काफी आतंक है।
एक और बात की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा, मैं गोवा में मीरामार के पास तक सैर के लिए जाता हूँ, मैंने देखा है कि वहाँ लोगों के बैठने के लिए सडक किनारे जो बेंच लगाए गए हैं उनमें से बहुत से बेंच, कुछ दुष्ट लोगों द्वारा उखाड दिए जाते हैं, ऐसा विशेष रूप से वहाँ किया गया है जहाँ सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, ऐसे लोगों की भी पहचान करके ऐसी सज़ा दी जानी चाहिए कि वे दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करें।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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