कुओं से पनघटों से!

हमेशा एक प्यासी रूह की आवाज़ आती है,
कुओं से पनघटों से नद्दियों से आबशारों से|

कैफ़ भोपाली

2 responses to “कुओं से पनघटों से!”

  1. बहुत सुंदर 👌

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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