आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
भवानी दादा की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता –

अंदाज़ लग जाता है
कि घिरने वाले हैं बादल
फटने वाला है आसमान
ख़त्म हो जाने वाला है
अस्तित्व
सूर्य का
इसी तरह
सुनाई पड़ जाता है स्वर
परिवर्तन के तूर्य का
कि छँटने वाले हैं बादल
साफ़ हो जाने वाला है फिर
आसमान
और गान
फिर गूँजने वाले हैं
पंछियों के और हमारे !
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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