अब इस क़दर भी न!

अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए|

उबैदुल्लाह अलीम

2 responses to “अब इस क़दर भी न!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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