इक धूल भरी शाम!

तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन,
मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल|

शकील आज़मी

One response to “इक धूल भरी शाम!”

  1. \(^^)/(^o^)😇

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