इन सराबों पे कोई!

हम ने ढूँडें भी तो ढूँडें हैं सहारे कैसे,
इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे|

जावेद अख़्तर

2 responses to “इन सराबों पे कोई!”

  1. वाह वाह।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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