कि शाहज़ादी ग़ुलामों!

तमाम शहर में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू है यही,
कि शाहज़ादी ग़ुलामों में आ के बैठ गई|

मुनव्वर राना

One response to “कि शाहज़ादी ग़ुलामों!”

  1. वाह बहुत खूब

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