दुबई में यह पहला सप्ताहांत, रविवार का दिन, 26 जनवरी, सुबह टी.वी. पर गणतंत्र दिवस की परेड देखी और उसके बाद नाश्ता करके लगभग 12 बजे, भारतीय समय 1-30 बजे के आसपास आबू धाबी की ओर रवाना हुए, स्वामी नारायण मंदिर देखने के लिए, जो घर से लगभग 85 किलोमीटर है।

भारत में जहाँ अधिकतर अधिकतम गति सीमा ही लागू होती है वहीं दुबई में अनेक मार्गों पर न्यूनतम गति सीमा 120 कि.मी. प्रति घंटा है, अगर स्पीड लेन में इससे कम गति से ड्राइव करेंगे तो चालान हो जाएगा और राडार के माध्यम दर्ज किए गए इस चालान की सूचना आपको मैसेज या मेल के माध्यम से प्राप्त हो जाएगी।

शायद दो-तीन वर्ष पहले इस मंदिर का उद्घाटन हुआ था और उस आयोजन में मोदी जी भी आए थे, तो देर से ही सही लेकिन मुझे भी सपरिवार यहाँ आना था। सो वह दिन आ गया था। हमारे लिए पहले ऑनलाइन हमारे लिए बुकिंग की गई, जिसमें हमारी आई डी, पासपोर्ट आदि का विवरण दिया गया था, जिससे वहाँ पहुंचने पर असुविधा न हो। यहाँ की फास्ट ट्रैफिक वाली चौडी सडकों पर हमारे यहाँ की राइट हैंड ड्राइविंग में एक्सपर्ट हो चुके मेज़बान बेटे ने एक घंटे में हमें वहाँ पहुंचा दिया।

काफी लंबी लाइनें थीं लेकिन व्यवस्था अच्छी थी जिसके कारण अधिक टाइम नहीं लगा। मंदिर के बारे में तो क्या कहूँ, बहुत सुंदर मंदिर बना है, सभी ईश्वर अपने स्थानों पर विराजे हैं। मंदिर में अंदर बाहर बहुत सुंदर नक्काशी की गई है, जिसमें जहाँ घोडे, ऊंट, हाथी, हिरन आदि हैं, वहीं बहुत से कथा प्रसंग भित्ति चित्रों के माध्यम से दर्शाए गए हैं।
इस विषय में अधिक लिखने की जगह यही कहूंगा कि अगर आप इस क्षेत्र में आते है तो इस मंदिर में दर्शन अवश्य करें।
आज के लिए इतना ही, नमस्कार।
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