आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता –

कारों की रेस में
शामिल बैलगाड़ियाँ
ख़ुश है घोड़ागाड़ियों को देख कर
सभ्यता का विकास बरकरार है यहाँ
सर के ऊपर से गुज़रते हवाई जहाजों के
बावजूद।
चेहरे या तो बेरंग है
या फिर बदले हुए
मुलाक़ातें मुलाक़ातों की तरह नहीं है
प्रेमिकाएँ तक झूठ बोलती है यहाँ
दोस्त कहे जाने वाले लोग भी।
प्यार और दोस्ती के लिए
झूठ जरूरी है दिल्ली में
जमुना के बे-सेहत पानी की तरह
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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