मस्ती भरी नज़र से!

होश-ओ-हवास पे मिरे बिजली सी गिर पड़ी,

मस्ती भरी नज़र से पिला के चले गए|

मजरूह सुल्तानपुरी

2 responses to “मस्ती भरी नज़र से!”

  1. Beautiful poem! 😊

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