गर्दिश-ए-वक़्त का!

गर्दिश-ए-वक़्त का कितना बड़ा एहसाँ है कि आज,
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें।

शहरयार

4 responses to “गर्दिश-ए-वक़्त का!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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