गुल सा खिला दिया!

शब-ए-माहताब ने शह-नशीं पे अजीब गुल सा खिला दिया,
मुझे यूँ लगा किसी हाथ ने मिरे दिल पे तीर चला दिया|

मुनीर नियाज़ी

2 responses to “गुल सा खिला दिया!”

  1. Interesting post!

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