मेरे अहद के इंसानों!

मेरे अहद के इंसानों को पढ़ लेना कोई खेल नहीं,
ऊपर से है मेल-मोहब्बत, अंदर से है खिंचाव बहुत|

क़ैसर शमीम

2 responses to “मेरे अहद के इंसानों!”

  1. बिल्कुल सत्य

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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