आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीत कवि श्री नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ|
नचिकेता जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत –

दीन-दलित के कीर्तन गाओ
राजा आएँगे।
तोरन-बन्दनवार सजाओ
राजा आएँगे।
उद्घाटन होगा
नूतन श्मशान घरों का
होगा मंगल-गान मूक,
अँधे, बहरों का
फरियादी को दूर भगाओ
राजा आएँगे।
माला लेकर
खड़े हुए तस्कर, अपराधी
बड़े सेठ के घर में है
बेटी की शादी
नयी प्रगति का जश्न मनाओ
राजा आएँगे।
बिन त्योहार मनाई जाएगी
दिवाली
खूब बहेगी महँगी मदिराओं
की नाली
जनहित के नगमे दुहराओ
राजा आएँगे।
छोड़ी जाएगी
आश्वासन की फुलझड़ियाँ
चीख़ों के होठों पर हों
गीतों की लड़ियाँ
कमलछाप झण्डा लहराओ
राजा आएँगे।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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