डर है नज़र तुम्हारी!

बड़े मज़े से मैं पी रहा हूँ मिरी तरफ़ तुम अभी न देखो,
मुझे ये डर है नज़र तुम्हारी शराब को बे-असर न कर दे|

क़तील शिफ़ाई

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