इक सुख़न और कि!

इक सुख़न और कि फिर रंग-ए-तकल्लुम* तेरा,
हर्फ़-ए-सादा को इनायत करे ए’जाज़ का रंग|

*Talking,

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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