दिल-ए-नाशाद रोता!

दिल-ए-नाशाद रोता है ज़बाँ उफ़ कर नहीं सकती,
कोई सुनता नहीं यूँ बे-नवा फ़रियाद करते हैं|

चकबस्त ब्रिज नारायण

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