क़ैद से आज़ाद करते!

नया मस्लक नया रंग-ए-सुख़न ईजाद करते हैं,
उरूस-ए-शेर को हम क़ैद से आज़ाद करते हैं|

चकबस्त ब्रिज नारायण

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